इस साल पेश होने वाला बजट भाजपा सरकार का चौथा बजट है और आख़िरी पूर्ण बजट है. मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल अगले साल मई तक है और इससे पहले नई लोकसभा के लिए चुनाव होंगे.
भाजपा को ऐसे वक्त आख़िरी बजट पेश करने का मौका मिल रहा है जब अर्थव्यवस्था ख़राब स्थिति में है.
बीते तीन साल के जीडीपी आंकड़े देखें तो 2015-16 में ये 7.9 फीसदी था, 2016-17 में ये 7.1 फीसदी हो गया और 2017-18 में 6.5 फीसद तक नीचे आ गया. ये सभी सरकारी आंकड़े हैं.
साथ ही कृषि क्षेत्र की ग्रोथ लुढ़क गई है और किसानों की आमदनी पर बहुत चोट पहुंची है. मोदी जब आए थे तो उन्होंने कहा था कि लागत पर पचास प्रतिशत मुनाफ़ा मिलेगा. बाद में उन्होंने कहा कि किसानों की आय को 2022 तक दोगुना किया जाएगा. मगर ऐसा कुछ होता नहीं दिख रहा है.
साथ ही बेरोज़गारी भी बढ़ती जा रही है और नोटबंदी के बाद से छोटे उद्योगों की स्थिति भी ख़राब हुई है. इसको ठीक करने का एक प्रयास होगा आख़िरी बजट में.
सरकार के सामने बढ़ते वित्तीय घाटे की चुनौती भी है. जीएसटी को बड़ा आर्थिक सुधार बताया जा रहा था, लेकिन इस कारण सरकार की आमदनी कम होती दिख रही है. जानकारों का कहना है कि सरकार को जीएसटी को ठीक से लागू नहीं कर पाने के कारण एक लाख करोड़ रुपये का घाटा होगा.कहा जाए तो अर्थव्यवस्था पर सरकार संकट से घिरी है. लोगों की नज़रें भी इस बात पर हैं कि उन्हें बजट में कुछ ख़ास मिलेगा या नहीं.

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